नेशनल हेराल्ड मामला: कोर्ट के आदेश के बाद इस रणनीति पर मंथन कर रही ED
नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड केस में राउज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया इसके बाद अब ईडी आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर तैयारी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर ईडी आगे की कार्रवाईकर सकती है। क्योंकि ईडी का कहना है कि कोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया है जबकि इस केस के तथ्यों या आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ऐसे में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ED जल्द ही आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है।
ED की चार्जशीट पर कोर्ट ने क्या कहा?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ED द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट किसी अनुसूचित अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) से जुड़ी FIR पर आधारित नहीं थी, बल्कि एक निजी शिकायत के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की गई थी। अदालत ने कहा कि इस स्थिति में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्यवाही पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता।इसके तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तभी संभव है जब किसी आपराधिक गतिविधि से संबंधित विधिवत FIR दर्ज हो, निजी शिकायत उसके स्थान पर स्वीकार्य नहीं है। इसी कानूनी आधार पर अदालत ने चार्जशीट को संज्ञान योग्य नहीं माना।
तत्कालीन ED अधिकारी की राय
इस मामले में वर्ष 2014 में प्रवर्तन निदेशालय के तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर हिमांशु कुमार लाल ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग को पत्र लिखकर भी यही राय दी थी कि नेशनल हेराल्ड प्रकरण में किसी भी प्रेडिकेट अपराध के तहत FIR दर्ज नहीं है, ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू करना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। उन्होंने CBI को FIR दर्ज करने को कहा इसके बावजूद संबंधित FIR दर्ज नहीं की गई।
नेशनल हेराल्ड केस क्या है ?
नेशनल हेराल्ड केस की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए।
शिकायत के अनुसार, घाटे में चल रहे नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए ‘यंग इंडियन लिमिटेड’ नामक कंपनी बनाई गई, जिसमें गांधी परिवार की बहुसंख्यक हिस्सेदारी होने का दावा किया गया। आरोप है कि इसी कंपनी के जरिए नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के नियंत्रण से जुड़े वित्तीय लेन-देन किए गए। याचिका में दिल्ली के बहादुर शाह ज़फर मार्ग स्थित हेराल्ड हाउस समेत AJL की संपत्तियों के स्वामित्व और मूल्यांकन को भी विवादित बताया गया है।

